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Friday, 21 September 2018

great womens of indian history in hindi

आज इस पोस्ट मै आप ऐसी कुछ महान महिलाओ के बारे मे बताने जा रहा हुँ जो न सिर्फ भारतीय इतिहास मे बल्की पुरे विश्व के इतिहास मे अपनी अनोखी छाप छोडती है।इन महिलाओ ने शिक्षा से लेकर राजनीति तक और भक्ति से लेकर शक्ति तक के क्षेत्रो मे जिस प्रकार अपने लौहा मनवाया उससे इन्होने ये साबित कर दिया की भारतीय स्त्रीयाँ अबला नही सबला है। तो चलिए जानते ऐसी भारतीय महिलाओ के बारे मे।
  • गार्गी
गार्गी वैदिक काल की एक विदुषी महिला थी।इनके पिता महर्षि वाचकनु थेइसलिए इनका नाम वाचकन्वी रखा गया और महर्षि गर्ग के कुल मे जन्म लेने के कारण इन्हे गार्गी नाम से जाना जाता है।
            गार्गी एक महान प्राकृतिक दार्शनिक, वेदो की व्याख्याता और ब्रह्म विद्या की ज्ञाता थी। इन्होने शास्त्रार्थ मे कई विद्वानो को हराया था। एक बार राजा जनक द्वारा आयोजित यज्ञ मे गार्गी ने महर्षि याज्ञवल्क्य से शास्त्रार्थ किया। इस शास्त्रार्थ मे गार्गी के द्वारा पुछे गए प्रशनो के उत्तर देने के लिए महर्षि याज्ञवल्क्य को ब्रह्म दर्शन का प्रतिपादन करना पड गया।
  • मैत्रयी
मैत्रेयी वैदिक काल की विदुषी और ब्रह्मवादनी स्त्री थी।ये मित्र ऋषि की कन्या थी। राजा जनक ने दरबार मे शास्त्रार्थ का आयोजन किया और इस आयोजन मे मैत्रयी ने कई विद्वानो को शास्त्रार्थ मे हरा दिया और अन्त मे इनका सामना महर्षि याज्ञवल्क्य से हुआ। इस शास्त्रार्थ मे याज्ञवल्क्य की हार हुई।महर्षि मैत्रयी को अपना गुरू बनाना चाहते थे परंतु मैत्रेयी ने उनसे विवाह कर लिया। मैत्रेयी ने उनसे विवाह इसलैए किया क्योकी उन्हे पुरी सभा याज्ञवल्क्य समान विद्वान नही मिला। कुछ सालो बाद महर्षि याज्ञवल्क्य ने गृहस्थ आश्रम त्याग कर वानप्रस्थ आश्रम मे जाने का निर्णय लिया। तब उन्होने अपनी दोनो पत्नियो कात्यानी और मैत्रेयी मे सम्पति बाटना चाहते थे परंतु मैत्रयी ने सम्पति की जगह उशके साथ वानप्रस्थ जाने का निर्णय लिया।
  • महाप्रजापति गौतमी
महाप्रजापति गौतमी कोलिय राज्य की राजकुमारी थी और इनका विवाह कपिलवस्तु के शाक्य राजा शुद्धोधन से हुआ था। ये गोतम बुद्ध की मौसी और दत्तक माता थी।
            पारम्भ मे बोद्ध संघ मे स्त्रीयो का प्रवेश वर्जित था। बोद्ध संघ मे स्त्रीयो को प्रवेश करवाने के  लिए महाप्रजापति ने काफी संघर्ष किया। इन्होने सर्वप्रथम कपिलवस्तु मे बुद्ध से संघ मे स्त्री प्रवेश के लिए अनुरोध किया परंतु बुद्ध ने उसे अस्वीकार कर दिया। इस प्रकार महाप्रजापति ने कुल तीन असफल प्रयास किए। अंत मे वैशाली मे बुद्ध ने संघ के द्वार महिलाओ के लिए खोल दिए और महाप्रजापति गोतमी पहली महिला बनी जिसने बोद्ध संघ मे प्रवेश लिया।
  • रानी नागनिका
रानी नागनिका सातवाहन वंश के राजा शातकर्णी प्रथम की पत्नी थी। यह भागवत धर्म की अनुयायी थी और इन्होने नानाघाट के अभिलेख लिखवाया थे। शातकर्णी की मृत्यु के बाद इन्होने अपने अल्पवयस्क पुत्रो की संरक्षिका के तोर पर साम्राज्य पर राज किया।
  • रजिया सुल्तान (1236-39)
रजिया सुल्तान गुलाम वंश के दुसरे सुल्तान इल्तुतमिश की बेटी और उनकी उत्तराधीकारी थी। रजिया सुल्तान दरबार मे बुर्का डाले बिना आती,शिकार खेलती और सेना का नेतृत्व भी करती। वजीर निजाम-उल-मुल्क जुनैदि ने इनके सत्तारोहण का विरोध किया लेकिन वजीर को सुल्तान ने हरा दिया और वो भाग गया। इन्होने लाहोर के विद्रोह का दमन किया और सरहिंद जाते समय एक आंतरिक बगावत के कारण इनको कैद कर लिया गया परंतु कैद मे अल्तुनीया ने इनसे निकाह कर लिया। इन दोनो ने मिलकर दिल्ली को पुन जितने का प्रयास किया परंतु असफल रहे। अंत मे डाकुओ ने रजिया सुल्तान को मार दिया।इनके बारे मे कवि मिन्हाज सिराज कहता है कि"वह विवेकमयी, लोकोपकारी, अपने राज्य की हितैषी, न्याय करने वाली, प्रजापालक और महान यौद्धा थी।
  • मीराबाई
मीराबाई का जन्म 1498ई. मे मारवाड रियासत के मेडता जागीर के रतन सिंह की पुत्री के रूप मे हुआ। यह बचपन से ही कृष्ण भक्ति मे लगी रहती थी। इनका विवाह मेवाड के महाराणा सांगा के पुत्र भोजराज से कर दिया गया परंतु विवाह के कुछ समय पश्चात भोजराज की मृत्यु हो गई।राजपरिवार के सदस्य चाहते थे की वे सती हो जाए परंतु मीराबाई ने स्पष्ट मना कर दिया और कहाँ की अब वे कृष्ण भक्ति करेगी।उनके पति के छोटे भाई राणा विक्रमादित्य को इनकी कृष्ण भक्ति सेऐतराज था इसलिए उसने कई बार मीराबाई को मारने का प्रयास किया। इन सब यातनाओ से तंग मीराबाई मेवाड छोडकर मेडता चली गई और मेडता से वो वृन्दावन गई और अपने अंत समय मे वे द्वारक रही।
               मीराबाई एक सच्ची विद्रोही थी उन्होने तत्कालीन समाज मे व्यापत पर्दा प्रथा और सती प्रथा का त्याग करके समाज को बता दिया की स्त्री का सर्वेसर्वा उसका पति नही होता और मृत्यु के पश्चात भी एक स्त्री अपना जीवन जीने की अधीकारी है।
  • पन्नाधाय
पन्नाधाय मेवाड के महाराणा सांगा की पत्नी रानी कर्मावती की दासी थी। सन् 1535 मे गुजरात के बहादुरशाह ने मेवाड पर आक्रमण किया,तब रानी कर्मावती ने पन्नाधाय को अपने सबसे छोटे पुत्र उदयसिंह को सोपकर जौहर कर लेती है।इस युद्ध के कुछ समय बाद मेवाड के सामंत एक होकर पुनः चितौड को जीत लेते है और विक्रमादित्य को राणा बना देते है। विक्रमादित्य एक अयोग्य शासक था इस कारण से दासीपुत्र बनवीर ने षडयंत्र करके उसकी हत्या कर दी और उदयसिंह को मारने के लिए वो नंगी तलवार लेकर उसके कक्ष की तरफ जाने लगा।यह बात पन्नाधाय को पता चल जाती है तब वे उदयसिंह के स्थान पर अपने पुत्र चन्दन को सुला देती है और उदयसिंह को महल के बाहर भेज देती है। जब बनवीर वहा पहुचा तो उसने सोते हुए चन्दन को उदयसिह समझ कर उसकी हत्या पन्नाधाय के सामने कर देता है।
                  पन्नाधाय का यह पुत्र बलिदान विश्व इतिहास मे शायद इकलोता उदहारण है और इस बलिदान के कारण ही भारत मे महाराणा प्रताप जैसा वीर पुत्र पैदा हुआ।

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