onclick anti ad block

Wednesday, 24 October 2018

Most famous Freedom fighter of India in hindi

भारत के freedom fighters का Indian history में एक अलग ही महत्व है। इन लोगो ने Indian history की उस मान्यता को ख़त्म कर दिया जो यह कहती थी की भारतीय जनता अपने ऊपर होने वाले शासको के अत्याचारों का विरोध नहीं कर सकती। ये freedom fighter न सिर्फ स्वतंत्रता पूर्व भारतीयों के आदर्श थे बल्कि आज भी भारत के हज़ारों युवाओं के आदर्श है। आज मैं आपको Indian history के ऐसे ही कुछ freedom fighters ke बारे में बताने वाला हूँ जो अपने देश के लिए अपना जीवन दाव पे लगाकर Indian History में अपना नाम लिखवा गए।

  • मंगल पांडे 
मंगल पांडे का जन्म 19 जुलाई 1827 में हुआ। मंगल पांडे ने 22 साल की उम्र में British Indian Army को join किया। अंग्रेज़ों  ने भारतीय सेना में Enfield P-53 राइफल लाया। इस राइफल में कारतूस भरने के लिए  राइफल को मुँह से खोलना पड़ता था और ये खबर फैलाई गए की इस कारतूस में गाय और सुवर की चरबी थी। अतः भारतीय सैनिकों का ऐसा करना धर्म के विरुद्ध था। 9 फरवरी 1857 में ये राइफल सेना में बाटी गई तब मंगल पांडे ने इसका इस्तेमाल करने से माना कर दिया तब अंग्रेज़ों ने उनका court martial कर दिया। 29 मई 1857 को जब अँग्रेज़ अधिकारी मेजर ह्यूसन उनकी बन्दुक छीन ने लगा तब उन्होंने उस पर हमला कर दिया और उसे मार दिया इसके साथ ही मंगल पांडे ने एक और अँग्रेज़ अधिकारी को भी मार दिया और फिर अपने आपको गोली मारने  लगे परन्तु उन्हें पकड़ लिया गया और 8 अप्रैल 1857 को मंगल पांडे को फाँसी दे दी गई। 
                          मंगल पांडे की मृत्यु के एक महीने बाद 10 मई 1857 को मेरठ छावनी के भारतीय सेनिको ने विद्रोह कर दिया और यह विद्रोह धीरे धीरे पुरे उत्तर भारत और देश के अन्य हिस्सों में फैल गया और एक क्रांति में बदल गया। 
                      मंगल पांडे Indian history के पहले क्रांतिकारी  थे और इनके द्वारा जिस क्रांति का बीज बोया गया वो अगले 100 साल तक चलता रहा। 

  • रानी लक्ष्मीबाई  

freedom fighter
rani Lakshmibai

    रानी लक्ष्मीबाई जो आज झाँसी की रानी नाम से प्रसिद्ध है का जन्म 19 नवंबर 1828 में वाराणसी में हुआ था। इनके पिता श्री मोरपंत ताम्बे बिठूर के पेशवा बाजीराव के वहाँ सेवा करते थे। रानी लक्ष्मीबाई को बचपन से ही घुड़सवारी , शस्त्रसंचालन और आत्मरक्षा के सभी गुर सिखाए गए थे। सन 1842 में लक्ष्मीबाई का विवाह झाँसी के राजा गंगाधर राव नेवलकर से कर दिया गया, कुछ समय पश्चात उनका एक पुत्र हुआ जिसका नाम दामोदर राव रखा गया परन्तु मात्रा चार महीने बाद उस पुत्र की मृत्यु हो गई। दामोदर राव की मृत्यु के कुछ समय बाद रानी लक्ष्मीबाई और उनके पति ने आनंद राव नाम के लड़के को अपने रिश्तेदार से गोद लिया। सन 1853 में राजा गंगाधर की मृत्यु हो गई तब लॉर्ड डलहौज़ी ने 'व्यपगत के सिद्धांत ' के तहत झाँसी को अपने कब्ज़े में लेने का प्रयास किया और आनंद राव को राजा का उत्तराधिकारी नहीं माना। सन 1854 में ब्रिटिश सरकार ने एक गज़ट जारी करके झाँसी को अपने अधीन करने की कोशिश करी परन्तु रानी लक्ष्मीबाई ने झाँसी देने से माना कर दिया। सन 1857 में जब पुरे देश में अंग्रेज़ों  के ख़िलाफ़ बगावत हो गयी तब रानी ने झाँसी में बगावत का मोर्चा संभाल। जनवरी 1858 में सर हुज ने झाँसी पर हमला किया और किले पर अपना अधिकार कर लिया, रानी अपने दत्तक पुत्र के साथ वहाँ से निकल गए और कल्पी जाकर तात्या तोपे से मिली। 17 जून 1858 में रानी लक्ष्मीबाई ग्वालियर के निकट अंग्रेज़ों से युद्ध करते हुए वीरगति को प्राप्त हो गई।


    • ठाकुर कुशाल सिंह 
                                              
    freedom fighter
    ठाकुर कुशाल सिंह 
    सन 1857 की क्रांति की राजस्थान में शुरुआत नसीराबाद छावनी से हुई और मारवाड़ रियासत की छोटी सी जागीर के ठाकुर कुशाल सिंह ने इस क्रांति  का नेतृत्व किया। ठाकुर कुशाल सिंह अंग्रेज़ो से नफरत करते थे अतः उन्होंने बागी सेनिको का समर्थन किया। जब अंग्रेज़ों को इस बता का पता चला तब उन्होंने मारवाड़ के राजा तख्त सिंह से सहायता मांगी और 8 सितम्बर 1857 को राजा तख्त सिंह ने ठाकुर के खिलाफ सेना भेजी परन्तु इस सेना को ठाकुर कुशाल सिंह ने हरा दिया। तख्त सिंह ने इस सूचना का अजमेर पहुंचा दिया तब 18 सितम्बर 1857 को अजमेर के गवर्नर जनरल एजेंट सर पैटिक  लारेन्स और मारवाड़ के पोलिटिकल एजेंट एन मॉक मेसन ने आऊवा पर हमला कर दिया तब कुशाल सिंह ने लारेन्स को हरा दिया और मॉक मेसन को पकड़कर उसका गला काटकर अपने क़िले पर लटका दिया। इस हरा के बाद अंग्रेज़ों ने काफी बड़ी सेना लेकर आऊवा पर हमला कर दिया और ठाकुर कुशाल सिंह को वहाँ से भागना पड़ा और सन 1864 में इनकी मृत्यु हो गई
    Read History of Nadol(pali Rajsthan)  


    • अमरचन्द बांठिया 
                                           
    freedom fighter from rajasthan
    अमरचन्द बांठिया 
                                   
    अमरचन्द बांठिया का जन्म सन 1791 में बीकानेर में हुआ। वे अपने पिता के साथ व्यापार करने के लिए ग्वालियर चले गए। इनको नगर सेठ की उपाधि देते हुए ग्वालियर के राजपरिवार ने इन्हे राज कोष का प्रभारी बनाया। सन 1857 में जब रानी लक्ष्मीबाई और तात्या तोपे को धन की आवश्यकता पड़ी तब अमरचन्द ने उनको ग्वालियर का पूरा राज कोष और अपनी निजी सम्पति दान कर दी इसलिए इन्हे 1857 क्रांति का भामाशाह कहा जाता है। जब यह बात अंग्रेज़ों को इस बात का पता चला तब 22 जून 1857 को अंग्रेज़ों ने अमरचन्द बांठिया को पेड़ से लटकाकर फाँसी लगा दी।  

    • सागरमल गोपा 
                                     
    freedom fighter
    सागरमल गोपा 
                   
    सागरमल गोपा का जन्म 3 नवंबर 1900 में जैसलमेर में हुआ था। इन्होंने जैसलमेर में राजनैतिक चेतना के साथ साथ तत्कालीन राजा जवाहर सिंह के अत्याचारों का कड़ा विरोध किया इसलिए इनका प्रवेश हैदराबाद और जैसलमेर में प्रतिबन्धित था। लेकिन इसकी परवाह किये बगैर वे अपनी क्रन्तिकारी गतिविधियों को जारी रखते है और समाज में राजनैतिक चेतना पैदा करते है। 25 मई 1941 में इन्हे राजद्रोह के आरोप में जेल में डाल दिया जाता है और 4 अप्रैल 1946 को जेल में इनकी हत्या कर दी जाती है।  


    • बिरसा मुंडा 
                                           
    freedom fighter of India
    बिरसा मुंडा 
    बिरसा मुंडा का जन्म 1875 में झारखंड में हुआ था। बिरसा मुंडा, मुंडा जाति के आदिवासी थे। बिरसा मुंडा के माता पिता ने ईसाई धर्म अपना लिया परन्तु बिरसा मुंडा ने ऐसा नहीं किया और उन्होंने अपने आदिवासी समाज को अन्धविश्वास, मादक पदार्थों से दूर रहने के लिए कहा और स्वधर्म न छोड़ने को कहा। इन्होने आदिवासीयो को अंग्रेज़ों  के खिलाफ एक किया और 24 दिसंबर 1899 में बिरसा मुंडा ने अंग्रेज़ों के खिलाफ एक सशस्त्र आंदोलन शुरू किया। इस आंदोलन में आदिवासियों ने कई पुलिस थानों में आग लगा दी और वे सेना से भी लड़ने लगे परन्तु उसमे वे हार गए और 9 जून 1900 में बिरसा मुंडा की मृत्यु राँची जेल में हो गई। 

    आपको यह पोस्ट किसी लगी Comment box में comment करके बताए और आपको  Indian History From Beginning ब्लॉग से कैसी पोस्ट चाहिए वो भी comment करके बताए। 


    No comments:

    Post a Comment

    Latest Post

    Samudragupta Bharat ka ajay shasak

    Samudragupta भारत का एक ऐसा शासक था, जो अपने जीवन में एक भी युद्ध नहीं हारा। Samudragupta ने भारत के ऐसे युग की स्थापना की जो आज भारतीय इति...