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Wednesday, 16 January 2019

Sardar Vallabhbhai Patel और Statue of Unity से जुड़ी रोचक जानकारी जो आपको जाननी जरूरी है

                                                                 
Sardar vallabhai patel
sardar vallabhbhai patel 
आज कहानी एक ऐसे व्यक्ति की जिसने अपनी सूझबूझ और अपनी बुद्धिमानी से 562 रियासतों में बटे Bharat को एक किया और जिस देश को हम आज देख रहे है उसका गठन किया। आज हम उस व्यक्ति के बारे में जानेगे जिसने सत्ता से ज्यादा देश को सर्वोपरी रखा। आज हम जानेगे एक ऐसे Gujarati के बारे में जिसे दुनिया Sardar के नाम से जानती है।
                                                     तो चलिए जानते है Bharat के पहले गृहमंत्री Sardar Vallabhbhai Patel के बारे में और जानते है हाल ही में बने दुनिया के सबसे बड़े Statue 'Statue Of Unity' के बारे में। 
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प्राम्भिक जीवन 

Sardar Patel का जन्म और उनके माता पिता 

Sardar Vallabhbhai Patel की जन्म तारीख के बारे में उनको खुद भी पता नहीं था इसलिए उन्होंने मेट्रिक की परीक्षा में प्रवेश करने के लिए अपनी जन्म तारीख 31 अक्टूबर 1875 लिखा। उनके पिता का नाम झवेरभाई पटेल और माता का नाम लाड़बाई था। 

 Sardar Patel की शिक्षा 

Sardar Patel ने अपनी प्राम्भिक शिक्षा गुजराती माध्यम से ली और 1897 में  अपनी उच्च विधालय पास किया और वकालत की पढाई करने लगे। सन 1910 वे वकालत की पढाई के लिए इंग्लैंड चले गए और १९१३ में पढाई करके Bharat लोट आए। 

Sardar Patel का पारिवारिक जीवन   

सन 1897 Sardar Patel का विवाह जावेरबाबेन पटेल से हुआ। सन 1904 में इनके यहाँ एक बेटी का जन्म हुआ जिसका नाम रखा गया मणिबेन और 1906 में इनके यहाँ एक बेटे का जन्म हुआ जिसका नाम रखा गया ददयाभाई। सन 1909 में इनकी पत्नी को मुंबई के Hospital में cancer के इलाज के लिए भर्ती कराया गया और वही उनकी मृत्यु हुई। जब उनकी मृत्यु की सुचना Sardar Patel को मिली  तब Sardar Patel Court में गवाह से पूछताझ कर रहे थे उन्हें खत पढ़ा और जेब में रखकर वापिस सवाल जबाब करने लगे और उन्होंने उस case  भी लिया।  पत्नी की मृत्यु के बाद उन्होंने पुनः विवाह करने  मना कर दिया  बच्चो को सँभालने का निर्णय लिया।
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Sardar Patel का राष्ट्रीय आंदोलन में योगदान 

सन 1917  Sardar Patel को गुजरात सभा का secretary चुना गया और सन 1918 में खेड़ा सत्याग्रह में  उन्होंने गाँव-गाँव घूम-घूम कर किसानों से प्रतिज्ञा पत्र पर हस्ताक्षर कराया कि वे अपने को झूठा कहलाने और स्वाभिमान को नष्ट कर जबर्दस्ती बढ़ाया हुआ कर देने की अपेक्षा अपनी भूमि को जब्त कराने के लिये तैयार हैं। ब्रिटिश सरकार को किसानो के सामने झुकना पड़ा और उनका ऋण माफ़ करना पड़ा। सन 1921 में जब महात्मा गाँधी ने  जब non cooperation movement शुरू किया तब वे देश भर में घूम घूम कर आंदोलन का प्रचार किया और 300000 मेंबर और Rs 1. 5 million collect किए। 
                                                               सन 1928 में बारडोली के किसानो पर अंग्रेज़ी सरकार ने कर वृद्धि कर दी। तब Sardar Patel ने किसानो को कर न देने के लिए कहा तब अंग्रज़ी सरकार ने किसानो की जमीन जब्त कर ली फिर भी  किसानो ने छः महीने तक आंदोलन किया और अंत   झुकना पड़ा। 
                                                                   सं 1930 में नमक सत्याग्रह के समय जेल में डाल दिया गया।  उन्होंने गांधी जी की अनुपस्थिति ने सत्याग्रह को पूरी निष्ठां के साथ आगे बढ़ाया और सं 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में उन्होंने पुरे भारत में घूम कर राष्ट्रीय भावना  प्रचार  किया और  इस कारण से उन्हें  फिर से जेल में डाल दिया गया  उन्हें 1945 में छोड़ा गया। 

भारत का एकीकरण और Sardar Patel 

जब 1947 में अंग्रेज़ो ने Bharat छोड़ने का निर्णय लिया तब तो उस समय के वाइसराय लार्ड मौन्टबेटन ने Bharat में बढ़ती साम्प्रदायिकता देखते हुए अखंड Bharat के दो टुकड़े कर दिए एक bharat और दूसरा पाकिस्तान और सभी तत्कालीन रजवाड़ो को कहा की वो चाहे तो भारत  शामिल हो या पाकिस्तान में या अपना स्वतंत्र अस्तित्व बनाये रखे।  
                                               तब कांग्रेस ने भारत के एकीकरण की जिम्मेदारी सरदार पटेल को दी और उन्होंने 6 अगस्त 1947 को भारत के  एकीकरण का कार्य शुरू किया और 14 अगस्त 1947 को जम्मू-कश्मीर , जूनागढ़ और हैदराबाद के निज़ाम को छोड़ कर सभी रजवाड़े भारत में सम्मलित हो गए।
                                                         सरदार पटेल जनमत संग्रह करके जूनागढ़ रियासत को भारत में मिला दिया और वहा का नवाब अपनी रियासत छोड़ कर पाकिस्तान चला गया और हैदराबाद का निज़ाम अपने आप  स्वतंत्र रखना चाहता था तब सरदार पटेल ने वहाँ सेना भेजकर हैदराबाद पर कब्ज़ा किया। 
                                                    जम्मू कश्मीर के महाराजा भी अपने आप को स्वतंत्र रखना चाहते थी लेकिन पाकिस्तान  से उनके राज्य में घुस पैठ होने लगी तब उन्होंने भारत सरकार से मदद मांगी तब सरदार पटेल ने वहाँ सेना भेजकर पाकिस्तानी घुसपैठियो को खदेड़ दिया परन्तु जब तक सेना उन्हें पूरी तरह बहार निकाल पाती तब तक जवाहर लाल नेहरू ने इस मुद्दे को UNO को दे दिया और यह विवाद वर्तमान समय तक चल रहा है। 

Sardar Patel को समर्पित Statue Of Unity 

 इतिहास 

7 अक्टूबर 2010 को भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जो जी उस समय गुजरात के मुख्यमंत्री थे उन्होंने एक press conference में Statue Of Unity के निर्माण की घोषणा करी थी। तब इस project के निर्माण के लिए गुजरात सरकार ने "सरदार पटेल राष्ट्रीय एकता ट्रस्ट " बनाया। 
                                              इस कार्य को आगे बढ़ने के लिए स्टेचू ऑफ़ यूनिटी मूवमेंट चलाया गया जिसकी मदद से मूर्ति के निर्माण के लिए लोहा एकत्र किया गया। इस लोहे को एकत्र करने के लिए किसानो को उनके पुराने लोहे के औज़ार देने के लिए निवेदन किया गया। अतः 2016 तक लगभग 135 metric tonne इस्तेमाल किया गया लोहा एकत्र हुआ और उसमे से लगभग 109 tonne मूर्ति के निर्माण  प्रयोग किया गया। 
                                            इस project के समर्थन में 15 दिसंबर 2013 को सूरत में Run for Unity का आयोजन किया गया। 

  Design और Funding 

देश  इतिहासकार , मूर्तिकार और कलाकार सभी ने मिलकर सरदार पटेल के अलग अलग मूर्तियों को अध्यन करने के बाद इन  सभी ने देश के जाने माने मूर्तिकार श्री राम वानजी सुथार के बनाये हुए design को मंजूरी दी। 
     इस प्रोजेक्ट का निर्माण निजी और सरकारी साझेदारी हुआ। इस प्रोजेक्ट में  अधिकांश पैसा गुजरात सरकार में लगाया, गुजरात सरकार ने Rs. 6 billion का बजट 2012 -2015 के बीच इस प्रोजेक्ट में लगाया और 2015 -16 के केन्द्रीय बजट में इसके लिए Rs. 2 billion दिए गए। 

 Statue Of Unity से जुड़े रोचक जानकारी 

                                       
statue of unity
Statue Of unity 
     

  1. Statue Of Unity की हाइट 182 मीटर है और इसका निर्माण लगभग 3 साल और 6 महीने में हुआ जो की दुनिया के दूसरी सबसे बड़ी मूर्ति The Spring Buddha के बनने के समय से लगभग आधी है और Statue Of Liberty के निर्माण समय से लगभग 4 साल कम है। 
  2. इसके निर्माण के बाद ये लगभग 15000 आदिवासी लोगो सीधा रोज़गार देगी। 
  3. ये मूर्ति 60 मीटर प्रति सेकंड के वायु आवेग को और भूकंप को भी सहन कर सकती है। 
  4.  एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार दिसम्बर 2018 में स्टेचू ऑफ़ यूनिटी को देखने के  लगभग 2.97 लाख लोग आए और Rs. 6.38 करोड़ की कमाई हुई।     

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